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10 लक्षण जो कन्फर्म करेंगे आपकी (Symptoms Of Pregnancy)

जिस तरह हर महिला की शारीरिक बनावट अलग होती है उसी तरह हर महिला के लिए प्रेगनेंसी एक्सपीरियंस भी अलग होता है। कुछ महिलाओं में दोबारा प्रेग्नेंट होने पर भी जरूरी नहीं कि पहली प्रेगनेंसी के दौरान जो लक्षण थे वही दोबारा भी होंगे।

प्रेगनेंसी कन्फर्म करने का सबसे कारगर तरीका तो टेस्ट है, लेकिन टेस्ट कराने से पहले भी कुछ लक्षण (Symptoms of Pregnancy)  हैं, जिनसे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आप वाकई प्रेग्नेंट हैं या नहीं।

1- स्पोटिंग या क्रेम्पिंग (Spotting or Cramping)

गर्भधारण के 6 से 12 दिन में जब अंडा निषेचित या फर्टिलाइज़ होता तो गर्भाशय की दीवारों से चिपक जाता है। इस दौरान कभी कभी खून के हल्के धब्बे या क्रेम्पिंग हो सकती है। यह प्रेगनेंसी का सबसे पहला लक्षण है।

ब्लीडिंग के अलावा कई बार वेजाइना से सफ़ेद रंग का डिस्चार्ज भी होता है जो कि गर्भ धारण के तुरंत बाद वेजाइना वाल के मोटे हो जाने के कारण होता है। वेजाइना में सेल्स लाइनिंग की ग्रोथ बढ़ती है जिस कारण डिस्चार्ज होता है।

स्पोटिंग के लिए टिप्स (Tips for Spotting)

इस तरह का डिस्चार्ज पूरी प्रेगनेंसी के दौरान हो सकता है। यह एकदम नार्मल है और इसके लिए ट्रीटमेंट की जरुरत नहीं होती, लेकिन डिस्चार्ज के साथ आपको वेजाइना में खुजली, जलन या तेज बदबू आये तो यह यीस्ट इन्फेक्शन हो सकता है। तुरंत चिकित्सक से मिलें।

2- ब्रैस्ट में बदलाव (Breast Changes)

यह प्रेगनेंसी का एक और बड़ा साइन है। गर्भ धारण के बाद महिलाओं में हार्मोन लेवल लगातार चेंज होते हैं जिसके कारण ब्रैस्ट में सूजन या कड़ापन आ सकता है। आप खुद को नार्मल से हैवी महसूस कर सकती हैं। इसके अलावा निप्प्ल्स के आस पास का एरिया जिसे एरोला कहते हैं ज्यादा फैला हुआ और काला होने लगता है।

3- थकान (Tiredness)

गर्भधारण के एक हफ्ते बाद ही आप खुद को थका हुआ महसूस करने लगती हैं। ऐसा प्रोजेस्टेरोन हार्मोन लेवल के बढ़ने के कारण होता है। इसके अलावा ब्लड में शुगर लेवल कम होना भी एक वजह है।

4- जी मिचलाना (Nausea)

जी मिचलाना या नौसा या मॉर्निंग सिकनेस प्रेगनेंसी का सबसे आम लक्षण है। इस दौरान महिला को जी मिचलाना, उल्टी आना जैसी समस्याएं होती हैं। हालांकि, यह लक्षण पूरे दिन में कभी भी हो सकते हैं लेकिन ज्यादातर सुबह के समय ज्यादा देखने को मिलते हैं।

5- मिस्ड पीरियड (Missed Period)

महिलाओं में माहवारी होना प्राकर्तिक है। हर 28 वें दिन के चक्र पर महिला को पीरियड आता है, लेकिन पीरियड ना आना भी प्रेगनेंसी का सिम्पटम हो सकता है।

6- बार बार टॉयलेट जाना (Frequent Urination)

गर्भ धारण के 6 से 8 हफ्ते में महिला को बार बार यूरिनेसन की भी आदत हो सकती है।

ध्यान दें- ऐसा यूरिन इन्फेक्शन या शुगर के कारण भी हो सकता है।

7- कब्ज (Constipation)

गर्भधारण के दौरान प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है जिस कारण खाना आँतों में धीरे धीरे पास होता है। समस्या से निपटने के लिए खूब पानी पियें।

8- मूड स्विंग्स (Mood Swing)

अचानक मूड में परिवर्तन भी हो सकते हैं। कभी आप बहुत खुश, कभी उदास या चिड़चिडी भी हो सकती हैं। ऐसा हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है।

9- सर और कमर में दर्द (Headache and Backache)

किसी किसी को कमर और सर दर्द की शिकायत भी हो सकती है। लेकिन अगर दर्द सहने योग्य हल्का हो तो दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।

10- खाना पचने में हो दिक्कत (Digestion Problems)

कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आप थोडा सा कुछ खाएं, आपका पेट भरा भी ना हो लेकिन पेट भारी और अनइजी लगने लगे। कुछ दिन में यह परेशानी खुद ही ठीक हो जाती है। ऐसा अंडे के निषेचन और गर्भ के ठहरने के कारण होता है।

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