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Common Health Problems In Pregnancy Second Trimester

गर्भावस्‍था में स्वास्थ्य समस्‍यायें: बीच के तीन (4-6) महीनों के दौरान (Common Health Problems In Pregnancy Second Trimester)

गर्भावस्था के दूसरे तिमाही में गर्भवती महिला अन्य महीनों की तुलना में बेहतर महसूस करती है। इन महीनों में मिसकैरिज की संभावना बहुत कम होती है साथ ही शरीर में अन्य महीनों की तुलना में ज्यादा ऊर्जा महसूस होती है। शरीर में दर्द, मॉर्निंग सिकनेस आदि दिक्कतें भी कम हो जाती हैं फिर भी यह दूसरी तिमाही कई तरह की परेशानियों वाली होती है। सामान्यत: परेशानी नहीं होती लेकिन कुछ भी हो तो उसे अनदेखा भी नहीं किया जाना चाहिए।

1. रक्तस्त्राव (Bleeding in Pregnancy)
दूसरी तिमाही में सामान्यत: रक्तस्राव की दिक्कत नहीं होती है। यदि हो रही है तो ऐसा गर्भाशय में मेलफार्मेशन के कारण हो सकता है। इसलिए इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। इस दौरान रक्तस्त्राव कम हो या ज्यादा दोनों ही परिस्थितियों में चिकित्सक के पास जाना चाहिए।

2. समय से पहले प्रसव पीड़ा (Preterm labour pain)
यदि नौवें महीने से पहले प्रसव जैसी पीड़ा हो तो इसे समय से पहले प्रसव पीड़ा कहते हैं। इसका मतलब है कि या तो आपको समय से पहले ही डिलिवरी होगी या आप जुड़वाँ बच्चों को जन्म देंगी। इसके अलावा मेम्ब्रेन में किसी इन्फेक्शन के चलते भी ऐसा हो सकता है। 

इस दौरान वेजाइना पर दबाव, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, बार बार पेशाब आना, डायरिया, वेजाइना से स्त्राव का बढ़ना और पेट के निचले हिस्से में सख्तपन आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सक को अपनी स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए।

3. प्रीइक्लेमपसिया (Preeclampsia)
यह गर्भस्थ महिला की सीरियस परेशानी है जो कि लगभग 5 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में होती है। यदि आपको उच्च रक्तचाप की परेशानी है और यूरिन में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा है तो आपको तुरंत चिकित्सक से मिलकर इलाज कराना चाहिए।

4. एमनीओटिक फ्लूइड का कम होना या मेम्ब्रेन का टूट जाना (decrease of amniotic fluid or broken membranes)
एमनीओटिक फ्लूइड से बनी मेम्ब्रेन बच्चे को सहारा भी देती है और प्रोटेक्ट भी करती है। लेकिन जब यही फ्लूइड कम मात्रा में होता है तो इस स्थिति को Oligohydramnios कहते हैं। लगभग 4 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में यह दिक्कत हो जाती है। वहीं कई बार गर्भाशय बड़ा होने या दबाव से यह मेम्ब्रेन टूट भी जाती है और फ्लूइड बाहर निकल जाता है। दोनों ही परिस्थिति को गंभीरता से लेते हुए तुरंत हॉस्पिटल का रुख करना चाहिए।

5. सर्वाइकल इंकॉम्पेटेन्स (Cervical Incompetence)
यह अनकॉमन लेकिन सीरियस टाइप की परेशानी है जिसमें मिसकैरिज और प्री मैच्योर डिलिवरी दोनों के चांसेस होते हैं। ऐसा केवल 1 से 2 फीसदी महिलाओं में ही होता है। इस स्थिति में सर्विक्स नौवें महीने से पहले ही खुलना शुरू हो जाती है और पतली और लम्बी हो जाती है। इससे मेम्ब्रेन टूट सकती है और बच्चा समय से पहले जन्म ले सकता है।

6. चोट (Injury)
इस दौरान खुद भी सावधानी बरतनी चाहिए। दूसरी तिमाही में पेट बढ़ रहा होता है इसलिए सीढ़ियां चढ़ना उतरना, बहूत भारी सामान उठाना, हाई हील पहनना, टाइट कपड़े पहनना इन सबसे बचना चाहिए। ऐसा करने से पेट पर दबाव पड़ता है जिससे कई तरह की इंजरी सकती हैं।

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