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Common Health Problems In Pregnancy First Trimester

गर्भावस्‍था में आम स्वास्थ्य समस्‍यायें: पहले तीन (0-3) महीनों के दौरान (Common Health Problems In Pregnancy First Trimester)

आप माँ बनने वाली हैं, यह एक भावनात्मक और बेहद ख़ुशी देने वाली फीलिंग है। इस दौरान आपके शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं जिनमें से अधिकतर नार्मल होते हैं। लेकिन फिर भी कुछ ऐसे बदलाव भी हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। गर्भवती महिला के लिए शुरू के तीन महीने ख़ास ध्यान देने वाले होते हैं। इस दौरान कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। आइये आपको बताते हैं कि शुरू के तीन महीनों में क्या दिक्कत होने पर उसे खतरे की घंटी मान लेना चाहिए और तुरंत चिकित्सक को जानकारी देनी चाहिए।

1. वेजाइनल ब्लीडिंग (Vaginal Bleeding in pregnancy)
थोड़ा बहुत धब्बा आना नार्मल है लेकिन माहवारी की तरह ब्लीडिंग होना या थक्के आना मिसकैरिज का इशारा हो सकता है। यदि इस दौरान पेट में दर्द भी महसूस हो तो यह और भी खतरनाक हो सकता है।

क्या करें- तुरंत चिकित्सक से मिलें। चिकित्सक अल्ट्रासाउंड करके सभी लक्षणों की जांच करके रक्त की जांच करेगी और निष्कर्ष बताएगी।

2. बहुत ज्यादा उल्टी होना या जी मिचलाना (Excessive vomiting in pregnancy)
थोड़ी बहुत उल्टियां या जी का मिचलाना एकदम नार्मल है और अधिकांश महिलायें इस दौर से गुजरती हैं लेकिन समस्या डिहाइड्रेशन तक पहुँच जाए तो यह खतरनाक स्थिति है। यदि आप 12 घंटे से अधिक कोई भी लिक्विड नहीं रख पाती हैं तो तुरंत अपनी चिकित्सक से मिलें।

इसके मायने- वजन में कमी, बहुत ज्यादा कमजोरी और डिहाइड्रेशन

क्या करें- तुरंत चिकित्सक को दिखाएँ। ऐसी स्थिति में आपको अस्पताल में भर्ती भी किया जा सकता है।

3. तेज बुखार (High Fever in pregnancy)
गर्भावस्था में 101 डिग्री से तेज बुखार गंभीर लक्षण हो सकता है। यह शरीर में किसी इन्फेक्शन के होने का साइन हो सकता है जो कि बच्चे के लिये खतरनाक है। 

इसके मायने- गर्भावस्था के दौरान आये बुखार में यदि जोड़ों में दर्द भी हो तो यह Cytomegalovirus, Toxoplasma और Parvovirus हो सकता है।

क्या करें- चिकित्सक से मिलें। इन्फेक्शन को ट्रीट किया जा सकता है, लेकिन देर करने पर खतरा बढ़ सकता है।

4. वेजाइनल स्त्राव और खुजली (Vaginal discharge and itching during pregnancy)
कुछ स्त्राव नार्मल है लेकिन कुछ इन्फेक्शन, सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (एस टी डी) भी हो सकते हैं।

इसके मायने- यदि यह इन्फेक्शन है तो आपके बच्चे को हानि हो सकती है।

क्या करें- जल्दी चिकित्सक को परेशानी से अवगत कराएं।

5. यूरिनेशन में दर्द और जलन (Pain and burning when urinating)
गर्भावस्था में कई बार यूरिनेट करते समय दर्द और जलन होती है। लेकिन बार बार यह दिक्कत हो तो सचेत हो जाएँ।

इसके मायने- यह ब्लैडर या यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन हो सकता है। यदि समय पर इसका इलाज ना हो तो यह गंभीर हो सकता है जिसके कारण जल्दी प्रसव पीड़ा या जल्दी बच्चे का जन्म हो सकता है।

क्या करें- डॉक्टर को दिखाएँ। इसका इलाज संभव है।

6. पैरों में दर्द या सूजन (Swelling and pain in foot)
गर्भावस्था के दौरान थक्के जमने से अक्सर ऐसा होता है, लेकिन समस्या इतनी हो कि आपको चलने में भी दिक्कत हो तो चिकित्सक को दिखाएँ।

इसके मायने- कई बार थक्के फेफड़ों तक पहुँच जाते हैं जो कि भ्रूण के लिए खतरनाक है।

क्या करें- डॉक्टर को दिखाएँ। पैरों के नीचे तकिया रख कर सोएं। पैर लटका कर ज्यादा देर ना बैठें।

7. क्रॉनिक बीमारियां (Chronic Diseases)
यदि आप उच्च रक्तचाप, थायरॉइड, शुगर और अस्थमा जैसी बीमारी से ग्रसित हैं और गर्भावस्था के दौरान यह बीमारी कम नहीं हो रही हैं तो इनका असर बच्चे पर पड़ सकता है।

इसके मायने- मान लीजिये आपके थायरॉइड के हार्मोन बहुत ज्यादा या कम हैं तो यह मिसकैरिज के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

क्या करें- चिकित्सक को अपनी पूरी हेल्थ हिस्ट्री बताएं।

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