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गर्भावस्था देखभाल (Pregnancy Care)

गर्भावस्था या प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला की देखभाल (Pregnant Women Care) बेहद जरूरी होती है। प्रेगनेंसी के समय गर्भ के पहले महीने से लेकर डिलीवरी तक मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के प्रति सजगता दिखानी चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान हर महीने होने वाले टेस्ट (Pregnancy Tests) कराना, आयरन की गोलियां लेना, प्रेगनेंसी के दौरान डाइट (Diet in Pregnancy) और व्यायाम (Exercise in Pregnancy), मानसिक समस्या दूर करने के उपाय आदि जानना बेहद जरूरी है।

यह ‘लक्षण’ बताएंगे आप ‘प्रेग्नेंट’ तो नहीं (Pregnancy Symptoms Before Missed Period)

आमतौर पर गर्भावस्था के लक्षण (Pregnancy Symptoms) गर्भाधान के पहले सप्ताह के दौरान दिखाई देते हैं। लेकिन कई बार ऐसा नोटिस किया जाना संभव नहीं हो पाता, ऐसे में पीरियड मिस होना ही गर्भावस्था का संकेत होता है। लेकिन यदि महिलाएं ध्यान दें तो पीरियड मिस होने से पहले भी गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण देखे

क्या आप जानते हैं प्रेगनेंसी के प्रारंभिक लक्षण (Early Symptoms of Pregnancy in Hindi)

विवाहित महिलाओं के लिए शुरुआती प्रेगनेंसी को समझना कई बार बेहद मुश्किल होता है। प्रेगनेंसी अगर पहली बार हो तो यह और अधिक मुश्किल हो जाता है। अगर प्रेगनेंसी के बारें में शुरुआती दौर में ना पता चले तो कुछ असावधानियों के कारण हानिकारक समस्याएं हो सकती है। आइये जानें कुछ ऐसे लक्षणों (Early Symptoms of P

घर बैठे चैक करें प्रेग्नेंट हैं या नहीं (Method to check pregnancy at home)

गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण प्रत्येक महिला में अलग होते हैं। ऐसे में चिकित्सक के पास जाए बिना, घर पर ही गर्भवती हैं या नहीं इसकी जानकारी हो जाए, तो महिलाओं की एक बड़ी समस्या हल हो सकती है। टेस्ट भी ऐसे जिसमें आपको बाहर से कुछ खरीदने की जरूरत नहीं, घर पर उपलब्ध पदार्थों से टेस्ट के द्वारा प्रेग्नें

नॉर्मल डिलीवरी के लिए टिप्स (Normal Delivery Tips)

नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं तो रहें ‘एक्टिव’ बदलते लाइफस्टाइल की वजह से आजकल नॉर्मल डिलीवरी मुश्किल होती जा रही है। अधिकांश मामलों में सीजेरियन (Ceasarion) से ही बच्चों को जन्म दिया जा रहा है। ऐसा होने के कई कारण हैं जैसे उचित खान-पान न होना, कोई स्वास्थ्य समस्या होना, दिनचर्या ठीक न होना, तनाव ज्यादा

गर्भावस्‍था में दिनचर्या: अंतिम तीन (7-9) महीनों के दौरान (Daily routine during third trimester pregnancy)

गर्भावस्था के आखिरी महीनों में विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। खाने पीने से लेकर साफ सफाई और आराम करने तक कहीं भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। पेट पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं पड़ना चाहिए साथ ही गर्भवती महिला को हमेशा खुश रहना चाहिए। आइये और कुछ विशेष ध्यान देने योग्य बातों के बारे में जानकारी

गर्भावस्‍था में दिनचर्या: बीच के तीन (4-6) महीनों के दौरान (Daily routine during second trimester pregnancy)

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही भले सबसे सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन दिनचर्या ठीक ना हो और सावधानी ना बरती जाए तो दुर्घटना कभी भी संभव है। ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है हर चीज योजना बना कर की जाए। इस दौरान हमेशा खुश रहें। अच्छी किताबें पढ़ें, अच्छा संगीत सुनें या जो भी आपको पसंद हो करें। इसके साथ साथ निम्

गर्भावस्‍था में दिनचर्या: पहले तीन (0-3) महीनों के दौरान (Daily routine during first trimester pregnancy)

गर्भवती होने का पता चलते ही गर्भवती महिला मन ही मन कई प्लानिंग करने लग जाती है। लड़का होगा या लड़की, बच्चे का नाम वगैरह। आइये आपको बताते हैं कि पहली तिमाही में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं। 1. हेल्थ केअर प्रोवाइडर का चुनाव (Choosing a healthcare provider)
गर्भवती होने का पता चलते ही अपनी ड

गर्भावस्‍था में आम स्वास्थ्य समस्‍यायें: अंतिम तीन (7-9) महीनों के दौरान (Common health problems in Pregnancy Third Trimester)

गर्भावस्था की आखिरी तिमाही बच्चे के आने के इन्तजार में कटती है, लेकिन इस दौरान गर्भवती महिला बहुत असहज महसूस करती है। पेट पूरी तरह बढ़ चुका होता है जिससे करवट लेकर लेटना, बैठना आदि में भी परेशानी शुरू हो जाती है। यह समय सबसे ज्यादा ध्यान देने का होता है। कई बार सबकुछ ठीक होते हुए भी कई समस्याएं अचानक

गर्भावस्‍था में स्वास्थ्य समस्‍यायें: बीच के तीन (4-6) महीनों के दौरान (Common health problems in Pregnancy Second Trimester)

गर्भावस्था के दूसरे तिमाही में गर्भवती महिला अन्य महीनों की तुलना में बेहतर महसूस करती है। इन महीनों में मिसकैरिज की संभावना बहुत कम होती है साथ ही शरीर में अन्य महीनों की तुलना में ज्यादा ऊर्जा महसूस होती है। शरीर में दर्द, मॉर्निंग सिकनेस आदि दिक्कतें भी कम हो जाती हैं फिर भी यह दूसरी तिमाही कई तर

गर्भावस्‍था में आम स्वास्थ्य समस्‍यायें: पहले तीन (0-3) महीनों के दौरान (Common health problems in Pregnancy First Trimester)

आप माँ बनने वाली हैं, यह एक भावनात्मक और बेहद ख़ुशी देने वाली फीलिंग है। इस दौरान आपके शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं जिनमें से अधिकतर नार्मल होते हैं। लेकिन फिर भी कुछ ऐसे बदलाव भी हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। गर्भवती महिला के लिए शुरू के तीन महीने ख़ास ध्यान देने वाले होते हैं। इस दौरान कु

गर्भावस्था में व्यायाम: अंतिम तीन (7-9) महीनों के दौरान (Exercise In Pregnancy Third Trimester)

गर्भावस्था के आखिरी महीने व्यायाम करने के लिए बहुत मुश्किल होते हैं। इस समय तक गर्भवती महिला का पेट पूरी तरह बढ़ चुका होता है जिससे शरीर भी भारी लगता है। लेकिन इन आखिरी महीनों में व्यायाम से आपका शरीर ना केवल लचीला बनेगा बल्कि मूड ठीक रहेगा और एनर्जी लेवल बढ़ा रहेगा। आखिरी तीन महीनों में बैलेंस मुश्कि

गर्भावस्था में व्यायाम: बीच के तीन (4-6) महीनों के दौरान (Exercise in Pregnancy Second Trimester)

गर्भावस्था का दूसरा चरण यानि की चौथे महीने से छठे महीने तक का चरण गर्भवती महिला के लिए सबसे आरामदायक होता है। इस महीने तक आते-आते मॉर्निंग सिकनेस खत्म हो जाती है और गर्भवती महिला खुद को ज्यादा रिलैक्स महसूस करती है। गर्भावस्था के दूसरे चरण में व्यायाम करने से एनर्जी लेवल बढ़ता है। इसके साथ ही व्याया

गर्भावस्था में व्यायाम: पहले तीन (0-3) महीनों के दौरान (Exercise in Pregnancy First Trimester)

गर्भावस्था में व्यायाम करना अच्छा है साथ ही सुरक्षित भी है। व्यायाम से गर्भावस्था में होने वाली कॉम्प्लीकेशन से बचा जा सकता है जैसे कि प्री- एक्लेम्पसिया। इतना ही नही गर्भावस्था में व्यायाम करने से नार्मल डिलिवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं और इससे प्रसव पीढ़ा सहने की भी शक्ति मिलती है। शुरुवात में गर्भ

गर्भावस्था में आहार: अंतिम तीन (07 – 09) महीनों के दौरान (Diet in Pregnancy Third Trimester)

गर्भावस्था के आखिरी तीन महीने बेहद ध्यान देने वाले होते हैं। इन दिनों में गर्भवती महिला को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गर्भ के अंतिम तीन महीनों के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे का सम्पूर्ण विकास होता है। उसका मेटाबोलिज्म भी बढ़ता है ऐसे में आप हेल्थी खाना खाएं जिससे आपके बच्चे को सम्पूर्ण

गर्भावस्था में आहार: बीच के तीन (04 – 06) महीनों के दौरान (Diet in Pregnancy Second Trimester)

सेलिब्रेट करने का एक और बहाना आपके पास है क्योंकि आपका दूसरा सेमेस्टर शुरू हो चुका है। इस सेमेस्टर यानी कि चौथे महीने से छठे महीने तक के सेमेस्टर को प्रेगनेंसी हनीमून पीरियड (Pregnancy Honeymoon Period) भी कहा जाता है क्योंकि इस सेमेस्टर तक आते आते जी मिचलाना, उल्टी और मॉर्निंग सिकनेस जैसी समस्याएं

मेडिकल टेस्ट जो जरूरी हैं प्रेगनेंसी के दौरान (Medical Test During Pregnancy)

गर्भधारण के दौरान समय-समय पर कई तरह की जांच की जाती हैं। इससे माँ और बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है। साथ ही कोई कंप्लीकेशन ना हो इसकी जानकारी भी चिकित्सक को हो जाती है। यदि कोई कंप्लीकेशन होती भी है तो समय रहते उसका इलाज कर बच्चे और माँ को किसी परेशानी में आने से बचाया जा सकता है। आइये जानत

माँ बनने की तैयारी है तो पहले कराएं ये मेडिकल टेस्ट (Medical Tests before Getting Pregnant)

हम सभी जानते हैं कि माँ बनने के लिए महिला को पूर्ण रूप से स्वस्थ होना जरूरी है। एक स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे मो जन्म दे सकती है। साथ ही, यदि महिला हर तरह से स्वस्थ है तो गर्भधारण करने या डिलिवरी के वक्त परेशानियां भी कम होंगी। इसलिए जरूरी है कि यदि आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं तो पहले डॉक्टर

गर्भावस्था में आहार: पहले तीन (0-3) महीनों के दौरान (Diet in Pregnancy First Trimester)

हर माँ चाहती है कि स्वस्थ बच्चे को जन्म दे। लेकिन इसके लिए माँ के सही खानपान का होना बेहद जरूरी है। बच्चे को पोषण उसी आहार से मिलता है जिसे माँ खाती है। शुरू के तीन महीने (First Trimester) जब भ्रूण बन रहा होता है तो उसके सही विकास के लिए फोलेट (Folate of Folic Acid) से भरपूर भोजन करना चाहिए जो बच्च

ये टेस्ट देंगे प्रेगनेंसी का एक्यूरेट परिणाम (Medical Tests for Pregnancy)

आप प्रेग्नेंट हैं यह जानने के कुछ कॉमन लक्षण होते हैं लेकिन इसकी शत-प्रतिशत कन्फर्मेशन टेस्ट ही दे सकते हैं। प्रेगनेंसी की जांच के लिए दो प्रकार के टेस्ट होते हैं एक यूरिन टेस्ट और दूसरा ब्लड टेस्ट। प्रेगनेंसी टेस्ट में यह बताया जाता है कि आपके यूरिन और ब्लड में ह्यूमन क्रियोनिक गोनडोट्रोफिन मौजूद

10 लक्षण जो कन्फर्म करेंगे आपकी (Symptoms of Pregnancy)

जिस तरह हर महिला की शारीरिक बनावट अलग होती है उसी तरह हर महिला के लिए प्रेगनेंसी एक्सपीरियंस भी अलग होता है। कुछ महिलाओं में दोबारा प्रेग्नेंट होने पर भी जरूरी नहीं कि पहली प्रेगनेंसी के दौरान जो लक्षण थे वही दोबारा भी होंगे। प्रेगनेंसी कन्फर्म करने का सबसे कारगर तरीका तो टेस्ट है, लेकिन टेस्ट करान

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