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टिटनस (Tetanus)

Tetanus

टिटनस (Tetanus)

मनुष्यों के घाव (Wound) में संक्रमण होने से टिटनस होता है जिसका कारण क्लोस्ट्रीडियम टिटानी बैक्टीरिया (Clostridium Tetani Bacteria) है। यही जीवाणु घाव या चोट में विष पैदा करता है जिससे टिटनस हो जाता है। धीरे-धीरे यही जहर पूरे शरीर में फैलने लगता है जिससे स्थिति घातक हो जाती है। टिटनस के कारण कई बार व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। टिटनस में शरीर की मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होती है और रूक रूक कर दर्द होता है। हालांकि किसी चोट के लगने के बाद यदि तुरंत टिटनस का टीका लगवाया जाए तो इससे होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है।

 

टिटनस चार प्रकार की होती है (Types of Tetanus): 

1. स्थानीय टिटनस (Local Tetanus)- यह सबसे साधारण टिटनस होती है, जिसमें घाव या उके आस-पास मांसपेशियों में ऐंठन के साथ दर्द महसूस होता है।

2. मस्तक टिटनस (Head Tetanus)- यह मुख्य रूप से सिर पर चोट या कान में संक्रमण के बाद (एक से दो दिनों में) तेजी से फैलती है। यह एक साथ कई मांसपेशियों को प्रभावित करती है। इसमें चेहरे की मांसपेशी भी प्रभावित होती है जिससे जबड़ा बंध जाता है। यह टिटनस जल्द ही साधारण टिटनस में तब्दील हो सकती है।

3. नवजात टिटनस (Infant Tetanus)- इस तरह की टिटनस उन बच्चों में ज्यादा होती है जिन्हें गर्भ में मां से इम्यूनिटी नहीं मिल पाती या गर्भवती होने के दौरान टीकाकरण न हुआ हो। ऐसे में कुछ नवजातों का नाभि का घाव सूखने में समय लग जाता है। कई बार उसमें संक्रमण भी हो जाता है। लगभग 14 फीसदी शिशु टिटनस से मर जाते हैं।

4. आम टिटनस (General Tetanus)- यह सबसे ज्यादा होने वाली टिटनस है। इसका असर सिर से शुरू होता है और शरीर के बाकी हिस्सों में फैल जाता है। इसके तहत व्यक्ति का जबड़ा बंद हो जाता है, चेहरे की मांसपेशियों में जकड़न महसूस होती है। गर्दन में ऐंठन, छाती और टांगों में जकड़न होती है। इस दौरान पसीना आना, हृदयगति बढ़ जाना और उच्च रक्तचाप भी हो सकता है।

 

Tetanus, टिटनस, Hindi

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