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छींकना (Sneezing)

Sneezing

छींक को एक सामान्य क्रिया माना जाता है। छींक प्रायः तब आती है जब हमारी नाक के अंदर की झिल्ली किसी बाहरी पदार्थ के घुस जाने से परेशानी महसूस करती है। हमारी नाक में म्यूकस झिल्ली होती है जिसके उत्तक (Tissues) और कोशिकायें (Cells) बहुत संवेदनशील होते हैं।

सर्दी के कारण छींक (Sneezing in Cold)

जुकाम या एलर्जी वगैरह की वजह से इस झिल्ली में सूजन आ जाती है तो इससे इन उत्तकों (Tissues) और कोशिकाओं Cells) की संवेदनशीलता बढ़ जाती है जिससे हमें छींक आने लगती है। 

छींक के फायदे (Benefits of Sneezing in Hindi)

छींक प्रतिरोधी तंत्र की प्रक्रिया का जरूरी  हिस्सा है, छींकने से शरीर के हानिकारक रोगाणु (Germs) बाहर निकलते हैं। छींक की क्रिया में छाती, पेट, डॉयफ्राम, गला, वाकतंतु जैसे कई अंग एक साथ काम करते हैं। ये सब अंग बाहरी पदार्थ को शरीर से बाहर निकालने के लिए एकजुट होकर काम करते हैं।

छींक के कुछ तथ्य (Facts of Sneezing in Hindi)

छींकते समय हमारे मुंह और नाक से बाहर निकलने वाली हवा की गति एक घंटे में डेढ़ सौ किलोमीटर से भी ज्यादा होती है। यही वजह है कि छींकते समय हमारे पूरे शरीर में एक कंपन-सा होता और आंखें भी बंद हो जाती हैं। सोते समय छींक नहीं आती है क्योंकि उस समय नसें आराम की अवस्था में होती हैं। आपके साथ छींक से जुड़ी नसों को भी आराम मिलता है इसलिए कभी भी नींद के दौरान आपको छींक नहीं आ सकती है।
 

 

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