close button

स्किन कैंसर (Skin Cancer)

त्वचा की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि को स्किन कैंसर (Skin Cancer) कहते हैं जो प्राय: शरीर के उस अंग की त्वचा में होता है जहां सूर्य की किरणें सीधे पड़ती है। जैसे चेहरा, होंठ, गर्दन, बांह, हाथ और महिलाओं की पैर की त्वचा पर। 

हालांकि कुछ ऐसे मामले भी देखे गए हैं जिसमें शरीर के उस अंगों की त्वचा में भी स्किन कैंसर हुए हैं जहां सूरज का किरणें पड़ती ही नहीं हैं जैसे- हथेली, हाथ की उंगलियों के नाखून की त्वचा, पैर के अंगूठे की त्वचा और जननांग।

स्किन कैंसर तब होता है जब त्वचा की कोशिकाएं असामान्य ढ़ंग से विभाजित होने लगती है। इस तरह के असामान्य विभाजन की स्थिति में काफी मात्रा में कैंसर सेल का निर्माण होता है। स्किन कैंसर हर तरह के स्किन टोन वाले व्यक्ति को हो सकता है। 

चाहे ड्राय स्किन हो, ऑयली स्किन, सेंसेटिव स्किन या नार्मल स्किन हो। त्वचा के रंग या त्वचा पर पाए जाने वाले तिल का आकार या रंग बदलने लगे तो यह स्किन कैंसर के लक्षण हैं। अगर सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बच कर रहा जाए तो स्किन कैंसर की संभावना कम होती है।

कौन सी कोशिकाओं में स्किन कैंसर होता है?

स्किन कैंसर की शुरुआत सबसे पहले त्वचा की सबसे उपरी परत से होती है जिसे इपीडर्मिस कहते हैं। इपिडर्मिस त्वचा की सबसे पतली परत है जो त्वचा की सुरक्षा करती है। इपिडर्मिस का निर्माण तीन तरह की कोशिकाओं से होता है।

सैक्वमस सेल- त्वचा की उपरी परत के ठीक नीचे की कोशिका जो त्वचा की आंतरिक बनावट में मुख्य भूमिका निभाती है।

बेसल सेल- यह त्वचा में नई कोशिकाओं का निर्माण करती है। यह सैक्वमस सेल के ठीक नीचे होता है।

मेलानोसाइट- मेलानोसाइट कोशिका स्किन पिगमेंट मेलानिन का उत्पादन करती है जिससे स्किन टोन और त्वचा के रंग का निर्धारण होता है। यह इपिडर्मिस के ठीक नीचे होता है। जब आप सूर्य की रोशनी या धूप मे होते हैं तो त्वचा की आंतरिक परत की सुरक्षा के लिए मेलानिन का उत्पादन काफी मात्रा में होने लगता है।

स्किन कैंसर मुख्य तौर पर तीन प्रकार के होते हैं (Types of Skin Cancer)

1. बेसल सेल कार्सिनोमा

यह कैंसर सबसे आम होता है। यह त्वचा की निचली परत की मूल कोशिकाओं में धीरे-धीरे बढ़ता है और शरीर के अन्य भागों में फैलता है। शुरुआती लक्षण मिलते ही इसका इलाज कराना जरुरी है। यह शरीर के उस भागों में होता है जहां सूर्य की पराबैंगनी किरणें सीधे पड़ती है जैसे चेहरा, कान, खोपड़ी।

2. सैक्वमस सेल कार्सिनोमा

यह स्किन कैंसर त्वचा की ऊपरी परत को प्रभावित करता है। ज्यादातर मामलों में सैक्वमस सेल कार्सिनोमा सूर्य की पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आने से होता है। ये आम तौर पर उन लोगों में पाया जाता है जो लोग ज्यादा समय धूप में बिताते हैं, खासकर उजली और नीली आंखों वाले लोग।

3. मेलानोमा

यह सबसे घातक होता है। इस कैंसर में गले में सूजन या खुजली महसूस कर सकते हैं, यह शरीर पर कहीं भी हो सकता है। इसमें तेजी से घाव बढ़ जाते हैं जो अक्सर कई रंगों जैसे काले और गुलाबी रंग के होते हैं। जब मेलेनोमा का उपचार नहीं किया जाता, तो यह त्वचा के अलावा शरीर के अन्य भागों में भी फैलने लगता है, जिससे हालत बहुत गंभीर हो जाती है।

 

Skin Cancer, स्किन कैंसर, Twacha Ka Cancer, Hindi

सम्बंधित रोग

त्वचा से जुड़े अन्य रोग

त्वचा केयर

Skin Care

राशिफल

धर्म

शब्द रसोई से