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मलेरिया का उपचार (Malaria Treatment)

सामान्य उपचार


मलेरिया का प्राथमिक उपचार (Treatment of Malaria in Hindi)

मलेरिया होने पर अधिक से अधिक कोशिश करनी चाहिए कि रोगी को जल्दी से डॉक्टर से ले जाकर जांच कराई जाए। जांच में मलेरिया की पुष्टि होने पर ही उपचार शुरु करना चाहिए। मलेरिया के दौरान कुछ अहम उपचार और प्रभावी कदम निम्न हैं: 

  • मलेरिया में क्लोरोक्विन जैसी एंटी-मलेरियल दवा (Chloroquine- Anti malarial medicine) दी जाती है। इन दवाओं के साइड - इफेक्ट्स हो सकते हैं, इसलिए इन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।
  • मरीज को पूरा आराम करने दें। उसे हर छह घंटे में पैरासिटामोल (Paracetamol in Malaria) दें और बार- बार पानी और तरल चीजें ( नीबू पानी , छाछ , नारियल पानी आदि ) पिलाएं।

बच्चों को मलेरिया होने पर (Hindi Tips for Malaria in Kids)

  • मलेरिया बुखार के दौरान बच्चों का खास ख्याल रखें।
  • बच्चे नाजुक होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए बीमारी उन्हें जल्दी पकड़ लेती है। ऐसे में उनकी बीमारी को नजरअंदाज न करें।
  • बच्चे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए इन्फेक्शन होने और मच्छरों से काटे जाने का खतरा उनमें ज्यादा होता है।
  • बच्चों घर से बाहर पूरे कपड़े पहनाकर भेजें। 
  • मच्छरों के मौसम में बच्चों को निकर व टी - शर्ट न पहनाएं। 
  • रात में मच्छर भगाने की क्रीम लगाएं।
  • अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो , लगातार सोए जा रहा हो , बेचैन हो , उसे तेज बुखार हो , शरीर पर चकत्ते (Rashes) हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
  • आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ - पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट को छूकर और रेक्टल टेम्प्रेचर लेकर उनका बुखार चेक किया जाता है। बगल से तापमान लेना सही तरीका नहीं है , खासकर बच्चों में। अगर बगल से तापमान लेना ही है तो जो रीडिंग आए, उसमें 1 डिग्री जोड़ दें। उसे ही सही रीडिंग माना जाएगा।

 

 

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