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सुस्ती (Lethargy)

सुस्ती (Lethargy)

कई बार शरीर में स्फूर्ति (energy) नहीं रहती। शरीर एकदम थका हुआ महसूस करता है, और बहुत कमजोरी महसूस होती है। कई बार आलस इतना होता है कि हमेशा नींद आती रहती है। इसी अवस्था को लिथारजी या सुस्ती कहते हैं। तनावपूर्ण माहौल या पोषण की कमी के कारण शरीर कमजोर होने लगता है। कई बार रात में अच्छी नींद न सोने पर भी अगले दिन थका हुआ महसूस करते हैं। लेकिन ज्यादा सुस्ती शरीर के लिए बेहद हानिकारक भी है। कई बार यह सुस्ती मौत की वजह भी हो सकती है, क्योंकि ज्यादा सुस्ती से ब्रेन के सेल्स भी सुस्त होने लगते हैं और धीरे धीरे कार्य करना बंद कर देते हैं। पूरे शरीर की स्वभाविक प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जो कई समस्याओं का कारण हो सकती है। ऐसे में शरीर को एक्टिव बनाये रखना बेहद जरूरी होता है।

 

सुस्ती, निम्न बीमारियों का कारण भी हो सकती है (Effects of Lethargy)

हृदय रोग (Heart Diseases):- जिस किसी भी व्यक्ति को हृदय रोग होता है या हार्ट अटैक आता है, चिकित्सक बताते हैं कि लगभग 70 फीसदी मामलों में ऐसे व्यक्ति कुछ हफ्ते पहले से ही सुस्ती महसूस करने लगते हैं। पुरूषों के मुक़ाबले महिलाओं में यह लक्षण ज्यादा नजर आते हैं।

 

लिवर समस्या (Liver Problem):- यदि कोई लगातार सुस्ती महसूस करे तो लीवर पर प्रभाव पड़ सकता है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन हो या कोई ड्रग लेने की लत हो तो हेपेटाइटिस सी की संभावना रहती है। हल्का बुखार, भूख न लगना और शरीर में दर्द इसके लक्षण हो सकते हैं।

 

एनीमिया (Anemia):- शरीर में आयरन की कमी भी सुस्ती का कारण हो सकता है, खासकर महिलाओं में। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, फीडिंग के बाद महिलाओं में आयरन की कमी हो जाती है, जिससे रंग पीला पड़ने लगता है, चिड़चिड़ाहट शुरू हो जाती है और सुस्ती छाई रहती है।

 

थायरॉइड (Thyroid):- कई बार थायरॉइड संबंधी समस्याएं भी सुस्ती (Susti) का संकेत हो सकती हैं, खासकर मध्यम उम्र के लोगों में। थायरॉइड ग्लैंड टी-4 और टी- 3 जैसे हार्मोन बनाती है, लेकिन मिड एज में यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

 

Lethargy, सुस्ती, Susti, Hindi

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