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इचिंग या खुजली (Itching)

त्वचा के किसी भी हिस्से में त्वचा को खुरचने की अनुभूति होना ही खुजली है। खुजली में एक शरीर में एक तरह का सेनसेशन होता है जो कि त्वचा को नोंचने (Scratch) या खुजलाने पर मजबूर कर देता है।

कई बार खुजली (Khujli) सामान्य हो सकती है लेकिन कई बार यह त्वचा संबंधी किसी बीमारी या अंदरूनी किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकती है। इचिंग या खुजली को स्वास्थ्य की भाषा में प्रूराइटस भी कहते हैं।

कई बार व्यक्ति बिना खुजली भी खुजलाता है, ऐसा व्यक्ति के तनाव में होने या अकेलापन महसूस करने के कारण होता है।

यदि खुजली बंद करने के लिए कोई घरेलू उपाय काम ना आ रहा हो या खुजली इतनी बढ़ गई हो गई हो कि व्यक्ति ठीक से सो भी ना पा रहा हो तो इस संबंध में तुरंत चिकित्सक से मिलना चाहिए, क्योंकि इस तरह की खुजली त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है।

यूं तो खुजली लंबे समय तक रहने वाली बीमारी नहीं और अपने आप ठीक हो जाती है। लबे समय तक रहने वाली खुजली किसी अंदरूनी बीमारी से संबंधित होती है जो कि समय के साथ बढ़ भी सकती है। ऐसे में खुजली के कारण को जानकर, इसका उपचार करना चाहिए।

खुजली के प्रकार (Type of Itching)

1. बिना दानों वाली खुजली

2. दाने वाली खुजली

3. बिना दाने या दाने वाली खुजली के कारण खुजली के अन्य लक्षण उत्पन्न होते हैं। खुजली पूरी त्वचा, सिर, मुंह, पांव, अंगुलियों, नाक, हाथ या प्रजनन अंग आदि अंगों में हो जाती है। खुजली अधिकतर इन्हीं स्थानों पर होती है।

4. बिना दानों वाली या दानों वाली खुजली खुश्क या तर हो सकती है।

दाने या बिना दाने वाली खुजली अलग- अलग परिस्थितियों में अलग-अलग प्रकार की हो सकती हैं। कोई खुजली नहाने के बाद कम हो जाती है, कोई रात को कपड़े बदलते समय बढ़ जाती है, कोई गर्म सेंक से घटती है, कोई स्थान बदल देती है। एक जगह खुजली ठीक होती ही दूसरी जगह होने लगती है। किसी खुजली में खुजलाते खुजलाते खून निकलने लगता है।

 

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